कुशीनगर में वायुसेना का जगुआर विमान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित

कुशीनगर
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कुशीनगर। कसया क्षेत्र के हेतिमपुर भैंसहा सदर के भरटोली के निकट सोमवार को वायुसेना का जगुआर विमान तकनीकी खराबी के चलते दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पायलट रोहित कटोच पैराशूट की मदद से उतर तो गए, लेकिन वह घायल हो गए। पैराशूट के सेमर के पेड़ पर फंस जाने से उनकी एक बांह टूट गई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों और कस्बों से भारी भीड़ जुट गई। डीएम-एसपी के साथ ही एबुलेंस और फायर बिग्रेड की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंच गईं। बाद में घायल पायलट को प्राथमिक उपचार करने के बाद एयर एंबुलेंस से गोरखपुर भेजा गया।

गोरखपुर एयरफोर्स स्टेशन से सोमवार को दो जगुआर विमान 12.15 बजे उड़े। इनमें से एक विमान विंग कमांडर रोहित कटोच उड़ा रहे थे। यही विमान दोपहर 12.20 बजे भैंसहा सदर टोला के पास हवा में लहराने लगा। खतरा भांप पॉयलट रोहित कटोच ने पैराशूट के साथ छलांग लगा दी। इसके दस मिनट बाद विमान आग के गोले में तब्दील होकर रिहायशी इलाके से 50 मीटर दूर गेहूं के खेत में गिर गया। साथ में उड़ान भर रहा दूसरा विमान घटनास्थल के ऊपर आसमान में कई बार चक्कर काटता रहा। खेत में पैराशूट के माध्यम से उतरे घायल विंग कमांडर रोहित कटोच ने जगुआर के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी मोबाइल फोन से एयरफोर्स स्टेशन गोरखपुर को दी। वहां से एक हेलीकाप्टर एयर एंबुलेंस लगभग एक बजे मौके पर पहुंचा।
सूचना मिलते ही डीएम डॉ. अनिल कुमार सिंह, एसपी राजीव नारायण मिश्र, सीएमओ डॉ. हरिचरण सिंह, स्वास्थ्य विभाग की टीम, फायर ब्रिगेड और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। डीएम ने बताया कि तकनीकी खराबी की वजह से जगुआर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। पॉयलट रोहित कटोच की सूझबूझ से बड़ा हादसा बच गया।
इनसेट
दोपहर बाद तीन बजे पहुंची टेक्निकल टीम
भैंसहा सदर टोला के भरटोली में हुए विमान दुर्घटना की जांच के लिए एयरफोर्स स्टेशन गोरखपुर की टेक्निकल टीम मौके पर पहुंच गई। दुर्घटना के कारणों की जांच के साथ ही विमान के मलबे को इकट्ठा कर गोरखपुर ले जाने की तैयारी चल रही है। विमान के मलबे के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है। मौके पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय सहित पुलिस विभाग के उच्चाधिकारी टेक्निकल टीम के साथ ब्लैक बॉक्स की तलाश में जुटे थे। विमान के छिटके मलबे को ढूंढने के लिए टेक्निकल टीम एक किलोमीटर की परिधि में छानबीन करती रही। विमान क्रैश स्थल से लगभग 200 मीटर की दूरी तक आबादी में मलबा पाया गया।

चंद कदम दूर आबादी में गिरा होता विमान तो मच जाती तबाही
आदित्य शाही
कसया (कुशीनगर)। जगुआर विमान हादसा बड़ा रूप ले सकता था, लेकिन संयोग अच्छा था कि विमान आबादी क्षेत्र में नहीं गिरा। इससे किसी तरह की जन-धन की हानि तो नहीं हुई, लेकिन दुर्घटना के समय तेज आवाज से लोगों की सांसें थम गई थीं। जो जहां था, वहीं से घटनास्थल की ओर से दौड़ पड़ा। जब तक लोगों को यह जानकारी नहीं हुई कि यह आवाज कैसी थी, लोगों की धड़कनें बढ़ी रहीं, लेकिन जब उन्हें पता चला कि भैंसहा हेतिमपुर सदर टोले के भरटोली में लड़ाकू विमान गिरा है तो लोगों में उसे देखने की कौतूहल बढ़ गई। हजारों की तादाद में लोग मौके पर घंटों तक जमा रहे। विमान के मलबे से रह-रहकर विस्फोट होता रहा। इससे वहा भगदड़ भी मच रही थी।
सभी बस यही कह रहे थे कि विमान भले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन पायटल की सूझबूझ से बड़ा हादसा बच गया। अगर विमान आबादी के बीच गिरा होता तो न जाने क्या होता। पायलट खुद की जान जोखिम में डालकर विमान को आबादी से बाहर ले गया। अगर उसका पैराशूट पेड़ में न फंसा होता तो वह घायल भी नहीं होता।

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