बाढ़ की दहशत से ग्रामीण तोड़ रहे मकान

कुशीनगर
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तमकुहीरोड (कुशीनगर)। जल संसाधन विभाग की ओर से गंडक नदी में दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने का अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसकी जानकारी होने पर पिपराघाट समेत एपी बांध के किनारे बसे गांवों के लोग सहम गए हैं। इसे लेकर बाढ़ खंड विभाग ने जहां बांधों पर चौकसी बढ़ा दी है, वहीं संभावित खतरे को देखते हुए अहिरौलीदान के लोगों ने पक्के मकानों को तोड़ने और सामानों को हटाने का कार्य तेज कर दिया है। लोगों का कहना है कि बंधे की स्थिति काफी जर्जर है। अगर अब भी प्रशासन की ओर से बचाव कार्य नहीं कराया गया तो गांवों को बचाना मुश्किल होगा। नेपाल की पहाड़ियों पर हो रही भारी बारिश को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने का अलर्ट जारी किया है। इससे पिपराघाट के साथ एपी बांध के किनारे बसे गांवों के लोग दहशत में हैं। पिछले सप्ताह जब लगातार दो दिन तक सवा लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, तो पिपराघाट से लगायत अहिरौली दान तक बंधे पर इतना दबाव बढ़ गया था कि लोग सकते में आ गए थे और पिपराघाट, तवकल टोला, शिवटोला, मुसहरी टोला, रानीगंज, जयपुर, नरवाटोला समेत अन्य कई टोले बाढ़ के पानी से घिर गए थे। यही नहीं उसी दिन से कचहरी टोला भी कटान की जद में आ गया।
मंगलवार को भी नदी का कटान जारी होने से लोग भयभीत हो गए हैं। लोग अपने पक्के मकानों को तोड़कर सामानों को हटाने में लगे हुए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि कचहरी टोले में 16 मई को प्रदेश सरकार की बाढ़ प्रबंधन मंत्री स्वाती सिंह ने दौरा भी किया था और उन्होंने गांव को कटान से बचाने के लिए बचाव कार्य जल्द शुरू कराने का आश्वासन भी दिया था। बावजूद इसके बचाव कार्य शुरू न होने के कारण गंडक नदी का कटान अब भी जारी है। आलम यह है कि रोज यहां दो से तीन पक्के मकानों को तोड़ा जा रहा है। अब तक 10 से 15 मकान तोड़े जा चुके है। कटान से प्रभावित गनेश चौहान, सुशील सिंह, अदालत पासवान, अशोक सिंह, गामा चौहान, विजय सिंह का कहना है कि प्रशासन जल्द कटान रोकने का कार्य शुरू कराए, नहीं तो डिस्चार्ज बढ़ने पर कचहरी टोला समेत कई गांवों का वजूद समाप्त हो सकता है।

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