सुप्रीम फैसलाः आधार इन सेवाओं के लिए जरूरी, यहां नहीं पड़ेगी जरूरत

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हालांकि कोर्ट ने कई सेवाओं में आधार नंबर का प्रयोग करना अवैध करार कर दिया है। आइये जानते हैं कि किन सेवाओं के लिए आधार कार्ड जरूरी और गैर-जरूरी हो गया है।

इनके लिए है जरूरी 

  • पैन कार्ड को आधार से लिंक कराना जरूरी है।
  • सरकारी योजनाओं जैसे सरकारी पेंशन, दिव्यांग, नेत्रहीन, राशन आदि उसके लिए आधार पहले की तरह जरूरी होगा।

इसके लिए नहीं होगा जरूरी आधार कार्ड 

  • छात्र के प्रवेश या फिर प्रतियोगी परीक्षा (सीबीएसई, नीट, यूजीसी-नेट, जेईई, कैट आदि) में शामिल होने वाले छात्र/छात्रा को भी आधार नंबर नहीं देना होगा।
  • अवैध प्रवासियों के लिए अब से आधार कार्ड नहीं बनेगा।
  • बैंक में खाता खोलने
  • मोबाइल सिम

यह राष्ट्र की जीत

साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने कहा कि, “कोर्ट ने आधार की कानूनी संवैधानिकता को वैध किया है। यह आधार की जीत है, यह सरकार की जीत है। भारत एकमात्र राष्ट्र है पूरी दुनिया में जहां पर पहली बार आधार को जारी किया गया है। आज के फैसले से आम जनता का उत्पीड़न बंद हो जाएगा। इससे लोगों को राहत मिली। अब निजी मोबाइल कंपनियां और बैंक आपसे खाता खुलवाने या फिर सिम लेने के लिए आधार देना बाध्य नहीं कर सकते हैं”।

नष्ट करना होगा डाटा

पवन दुग्गल ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले के बाद अब कंपनियों को आपका आधार डाटा नष्ट करना पड़ेगा। हालांकि ऐसा होने पर ग्राहकों को एक बार से केवाईसी की औपचारिकता को पूरा करना पड़ेगा। इसके लिए भी सरकार को नए नियम बनाने पड़ेंगे। अब आप फिर से पासपोर्ट, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड जैसे दस्तावेज की मदद से फिर से केवआईसी कर सकते हैं।

आधार की संवैधानिक वैधता बरकरार

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी ने आधार पर फैसला देते हुए कहा कि संवैधानिक रूप आधार वैध है। आधार की संवैधानिक वैधता और इसे लागू करने वाले वर्ष 2016 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर साढ़े चार महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

कोर्ट ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनूठा होना बेहतर है, आधार का अर्थ अनूठा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आधार के लिए यूआईडीएआई ने न्यूनतम जनांकीकीय और बायोमेट्रिक आंकड़े एकत्र किये।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आधार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं को समाज के वंचित तबके तक पहुंचाना है और वह ना सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि समुदाय के दृष्टिकोण से भी लोगों के सम्मान का ख्याल रखती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि आधार जनहित में बड़ा काम कर रहा है और आधार का मतलब है अनोखा और सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनोखा होना बेहतर है। न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा, किसी भी बच्चे को आधार नंबर नहीं होने के कारण लाभ/सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है।