Fact Check: पुलवामा हमले की साजिश रचते अमित शाह और राजनाथ सिंह की बातचीत का सच

राष्ट्रीय खबर
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

एक सोशल मीडिया वॉरियर हैं. अवि डांडिया. NRI हैं.  फेसबुक पर इनके ढाई लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. अवि करते क्या हैं? प्रोपगैंडा फैलाते हैं. EVM की सच्चाई से लेकर पुलवामा हमले की सारी खुफिया जानकारी इनके पास है. मतलब ऐसी-ऐसी जानकारियां जो जांच एजेंसियों, मीडिया हाउस, सरकार, विपक्ष, किसी के भी पास नहीं हैं, वो इनके पास हैं. अपने इसी काम के चलते इन्होंने फेसबुक पर 1 मार्च को एक  लाइव वीडियो किया. उसमें एक ऑडियो सुनाया जिसके जरिए दावा किया गया कि अमित शाह और राजनाथ सिंह पुलवामा हमले की साज़िश रच रहे हैं. इस वीडियो को 1 लाख से ज्यादा लोगों ने शेयर किया है. हालांकि अब इस वीडियो को अवि डांडिया ने हटा लिया है.

क्या है ऑडियो में
वीडियो में डांडिया दावा करता है कि सुनाए जा रहे ऑडियो में अमित शाह और राजनाथ सिंह की आवाज है. इस ऑडियो में एक महिला भी इन दोनों से बात कर रही है. महिला की कोई पहचान नहीं बताई गई है. इसमें राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर जवानों पर हमले की बात हो रही है. ऑडियो बहुत क्लियर नहीं है. बातचीत की ट्रांस्क्रिप्ट पढ़िए –

कथित अमित शाह : देश की जनता को गुमराह किया जा सकता है. और हम मानते भी हैं चुनाव के लिए युद्ध कराने की ज़रुरत है.
महिला : आपके कहने से ये तो नहीं हो सकता, अमितजी. बिना मुद्दे के आप युद्ध कैसे कर सकते हैं? अगर आतंकवादी हमला करते हैं, तो आतंकवादी हमले की कार्रवाई हो सकती है.
कथित राजनाथ सिंह : जवानों के सवाल पर हमारी देश बहुत सेंसिटिव है. बहुत संवेदनशील है. भावना उनके अंदर कूट कूट कर भरी है.
महिला : देश के जवानों को शहीद करवाना है?
राजनाथ सिंह : काम की रकम जो हो तय हो.
महिला : एक-दो से कुछ भी नहीं होगा. उरी किया था, कुछ भी नहीं हुआ. अभी चुनाव है, देश की सुरक्षा को लेके आप बड़ा मुद्दा बना सकते हैं. उसपे राजनीति खेलें.
राजनाथ सिंह : देश की सुरक्षा से जुड़े हुए सवालों पर इस तरह की राजनीति की जानी चाहिए.
महिला : राजनीति के लिए आप युद्ध करना चाहते हैं? एक काम करते हैं, कश्मीर में या कश्मीर के आस पास…
राजनाथ सिंह : अभी जम्मू और श्रीनगर
महिला : वहां ब्लास्ट करेंगे. कुछ आर्मी डेड, कुछ पैरामिलिटरी फोर्सेज डेड, या कुछ CRPF डेड. एक 100-50 जवान मरेंगे तो सारे देश की देशभक्ति एक जगह हो जाएगी. आप कोई इंतजाम करें. देखें फिर क्या राजनीति होती है.
राजनाथ सिंह : इतने बहादुर जवानों की शहादत पर इस तरीके की राजनीति की जानी चाहिए.
महिला : क्या गन्दी पॉलिटिक्स है अमित जी?
अमित शाह : नहीं, ये पॉलिटिक्स नहीं है भाई.
महिला : तो फिर है क्या ये? पॉलिटिक्स ही है. गन्दी पॉलिटिक्स।
अमित शाह : मुझे सीधा पूछ रहे हो? सुनिए अब, ये क्यों हुआ? कैसे हुआ?
महिला : मुझे नहीं सुनना है अमित जी, वैसे भी मैं नहीं करुंगी तो कोई और कर देगा. बम ब्लास्ट करवाना है बम ब्लास्ट करवा देंगे. आप लोग जैसे चाहते हैं वैसा हो तो जाएगा.
अमित शाह : देश के हर सैनिक घर का वातावरण क्या होगा?
महिला : खौफ बैठ गया है और क्या?
अमित शाह : डर बैठ रहा है, खौफ बैठ रहा है, और कोई रास्ते नहीं होते.
महिला : रास्ते तो बहुत होते हैं अमित जी. EVM था न आपके पास. ये सैनिकों को मरवाना जवानों को मरवाना ये मुझे समझ में नहीं आ रहा है, फिर भी आप चाहते हैं तो ब्लास्ट करवा देंगे. वैसे भी आप ही कहते हैं न, जवान सेना में भर्ती होते हैं शहीद होने के लिए. लेकिन दुश्मन के साथ अब आप लोग भी दुश्मन बने हुए हैं सेना के. तो कौन क्या कर सकता है?
अमित शाह : ऐसा ही होता है. हम कैसे बदल सकते हैं इसको?
महिला : मुझे बहस नहीं करनी आपसे, काम कर देंगे, पैसे भिजवा दीजियेगा और 12, 13 फरवरी तक ये सारा कुछ ताम-झाम करके आपको मैं फिर फ़ोन करती हूं. पैसे भिजवा दीजियेगा.
अमित शाह : मै बताता हूं.

सच क्या है?
ऑडियो सरासर फर्जी है. आपने उन वीडियो के मजे तो लिए ही होंगे जहां नेता गाना गा रहे होते हैं. जैसे नरेंद्र मोदी ‘जीने के हैं चार दिन…’ गा रहे हैं. अब बताने की जरुरत तो नहीं कि ये वीडियोज़ एडिटेड होते हैं. अलग अलग भाषणों को जोड़कर बस वो शब्द निकाल लिए जाते हैं जो गाने में हैं. ये हुआ टेक्नॉलजी का इस्तेमाल, मजाक के लिए. पर जो ऑडियो अवि डांडिया ने शेयर किया, वो है एडिटिंग का घटिया इस्तेमाल.
राजनाथ सिंह का इंडिया टुडे को दिया एक इंटरव्यू खंगाला ये भी साफ हो गया कि ये वाक्य कहां से जुटाए गए हैं.

इस तरह के संवेदनशील मामले में राजनीतिक फायदे के लिए झूठ फैलाना बहुत ही घटिया हरकत है. यह अपराध भी है. साथ ही यह ऑडियो बिना किसी सबूत के भी साफ तौर पर फेक समझ आता है.
‘ बहादुर जवानों की शहादत पर राजनीति की जानी चाहिए.’
कोई भी समझदार व्यक्ति यह वाक्य सुनकर ही इसे फेक बता देगा. फिर भी मूर्खता की हद तक जाकर ऐसी घटिया एडिटिंग की जा रही है. मगर हद तो तब हो जाती है जब 85 हजार लोग इसे सच भी मान लेते हैं. ये मूर्खों के सवा सेर हैं. सोशल मीडिया के एक्सपर्ट इसे ‘echo effect’ कहते हैं. इको मतलब आवाज की गूंज जो आपको वापस सुनाई देती है. यानी जैसे ही आप ऐसा कुछ सुनते हैं जो आप सुनना चाहते हों, तो बिना जांचे उसे झट से सच मान लेते हैं. बस इसी इको इफेक्ट के अंधे लोग हैं जो मूर्ख बन रहे हैं. भारत में भी और पाकिस्तान में भी.

इस फर्जी प्रोपगैंडा को अवि डांडिया ने तो हटा दिया, पर अब इस फर्जी खबर को पाकिस्तान का मीडिया भुना रहा है. शायद अवि डांडिया ने IT एक्ट में फेक न्यूज वाला क्लॉज़ पढ़ लिया हो. या राष्ट्र-विरोध वाला UAPA कानून पढ़कर पता चल गया हो कि जो भाईसाहब ने किया है वो कानूनन अपराध है. पाकिस्तान की लगभग सारी मीडिया में ये फर्जी खबर चली. इसमें ARY News , Siasat News, Zem TV, Daily Capital शामिल हैं.

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.